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फूल हरसिंगार के

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  फूल हरसिंगार के                               "सांझ खिले, भोर झरे, फूल हरसिंगार के"  प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन द्वारा लिखित, १९७१ की फिल्म 'फिर भी' के लिए रघुनाथ सेठ की संगीत-रचना पर हेमंत कुमार मुखर्जी और रानू मुखर्जी द्वारा गाया प्रसिद्ध गीत   है।          ‘फिर भी’ कमलेश्वर की कहानी ‘तलाश’ पर आधारित थी। इसकी पटकथा और संवाद भी उन्होंने ही लिखे थे। बाद में फ़िल्म की पटकथा हिंद पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुई थी। कमलेश्वर अपने संस्मरण ‘यादों के चिराग’ में लिखते हैं-‘शिवेंद्र सिन्हा मेरी कहानी ‘तलाश’ पर फ़िल्म बनाना चाहते थे। तीसरे दिन एफ़एफ़सी की स्क्रिप्ट कमेटी की मीटिंग थी, अतः रातों-रात ‘तलाश’ कहानी का पहला मसविदा तैयार किया गया, उसे नया नाम ‘फिर भी’ दिया गया।" इस गीत में स्थायी सहित तीन अंतरे हैं। देखेंगे        सांझ खिले, भोर झरे, फूल हरसिंगार के, रात महकती रही।        सांझ जले, भोर बुझे, दीप द्वार द्वार के, राह चमकती ...